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Thursday, May 6, 2010

राष्ट्रमंडल खेल पदक तालिका और इंगलैण्ड / सन्नी कुमार





अब तक अलग-अलग नामो के अंतर्गत 18 राष्ट्रमंडल खेल हो चुके हैं इन खेलो में देशो की संख्या 11 से बढ़कर अधिकतम 72 तक पहुँच चुकी है
इंग्लैण्ड ही एकमात्र ऐसा देश है जो शुरू से अब तक प्रत्येक खेल मे पदक तालिका में प्रथम तीन में शामिल रहा है
इसमें भी एक साल 1994 को छोड़ सभी वर्ष इंगलैण्ड प्रथम दो जगह बनाने में कामयाब रहा है
और जहाँ तक बात सबसे ज्यादा पदक हासिल करने वाले देश की है तो यह गौरव ऑस्ट्रेलिया को प्राप्त है
वह प्रथम राष्ट्रमंडल खेलो में पांचवे स्थान पर रहा था परन्तु उसके बाद वह भी प्रत्येक राष्ट्रमंडल खेल में प्रथम तीन पर काबिज़ रहा है


इंगलैंड का पदक तालिका में प्रथम स्थान का वर्ष

1930 25 स्वर्ण 23 रजत 13 कांस्य कुल 61

1934 29 स्वर्ण 20 रजत 24 कांस्य कुल 73

1954 23 स्वर्ण 24 रजत 20 कांस्य कुल 67

1958 29 स्वर्ण 22 रजत 29 कांस्य कुल 80

1966 33 स्वर्ण 24 रजत 23 कांस्य कुल 80

1986 52 स्वर्ण 43 रजत 49 कांस्य कुल 144

पदक तालिका में द्वितीय स्थान का वर्ष

1938 15 स्वर्ण 15 रजत 10 कांस्य कुल 40

1950 19 स्वर्ण 16 रजत 13 कांस्य कुल 48

1962 29 स्वर्ण 22 रजत 27 कांस्य कुल 78

1970 27 स्वर्ण 25 रजत 32 कांस्य कुल 84

1974 28 स्वर्ण 31 रजत 21 कांस्य कुल 80

1978 27 स्वर्ण 27 रजत 33 कांस्य कुल 87

1982 38 स्वर्ण 38 रजत 32 कांस्य कुल 108

1990 47 स्वर्ण 40 रजत 42 कांस्य कुल 129

1998 36 स्वर्ण 47 रजत 53 कांस्य कुल 136

2002 54 स्वर्ण 52 रजत 60 कांस्य कुल 166

2006 36 स्वर्ण 40 रजत 37 कांस्य कुल 113

पदक तालिका में तृतीय स्थान का वर्ष

1994 31 स्वर्ण 45 रजत 51 कांस्य कुल 127

Wednesday, May 5, 2010

राष्ट्रमंडल खेलो में क्रिकेट/Sunny kumar

अभी तक के हुए राष्ट्रमंडल खेलो में क्रिकेट को केवल एक बार 1998 क्वालालंपुर मलेशिया के खेलो में शामिल किया गया है जिसमे दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से हरा कर स्वर्ण पर कब्ज़ा किया था वहीँ न्यूज़ीलैंड ने कांस्य पदक प्राप्त किया था

Tuesday, May 4, 2010

दिल्ली : भारत की जान/ जंतर मंतर/ पुनीत कुमार

दिल्ली : भारत की जान/ जंतर मंतर/ पुनीत कुमार




तेरी आँखे भूलभूलैया, तेरी बातें भूलभूलैया...........अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस लेखक को क्या हो गया है, जो भूलभूलैया की बातें कर रहा है. दोस्तों में भूलभूलैया की बातें इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि आज मैं ले चलूँगा,दिल्ली के सबसे रहस्यमयी भूलभूलैया जंतर मंतर में, तो दोस्तों आइये जानते है जंतर मंतर के राज़ को और भी करीब से......

जंतर मंतर
जंतर मंतर दिल्ली के कनाट प्लेस में स्थित है, इसका निर्माण खगोल शास्त्र प्रेमी सवाई राजा जय सिंह द्वितीय ने १७२४ में करवाया था
इसको बनवाने में ६ साल लग गए थे. यह इमारत प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उन्नति की मिसाल है, जय सिंह ने ऐसी वेधशालाओं का निर्माण जयपुर, उज्जैन , मथुरा, और वाराणसी में भी किया था. दिल्ली का जंतर मंतर समरकंद की वेधशाला से प्रेरित है. मोहम्मद शाह के शासन काल में हिन्दू और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों में ग्रहों की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई थी. इसी को ख़त्म करने के लिए सवाई जय सिंह ने जंतर मंतर का निर्माण करवाया था. ग्रहों की गति नापने के लिए यहाँ विभिन्न प्रकार के उपकरण लगाये गए हैं.1948 में इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिला




सम्राट यंत्र ; -

सूर्ये की सहायता से वक़्त और ग्रहो की स्थिति की जानकारी देता है.



मिश्र यंत्र : -

वर्ष के सबसे छोटे और सबसे बड़े दिन को नाप सकता है.



राम यंत्र और जय प्रकाश यंत्र : -

यह यंत्र खगोलीय पिंडो की गति के बारे में बताते है. राम यंत्र गोलाकार बने हुए है.



राजा जय सिंह तथा उनके राज ज्योतिषी पं० जगन्नाथ ने इसी विषय पर " यंत्र प्रकार " तथा " सम्राट सिद्धांत" नामक ग्रन्थ लिखे. ५४ वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु के बाद देश में ये वेधशालाएँ बाद में बनने वाले तारामंडलो के लिए प्रेरणा और जानकारी के स्त्रोत बनी. हाल ही में दिल्ली के जंतर मंतर में स्थापित रामयंत्र के जरिये प्रमुख खगोलविद द्वारा विज्ञान दिवस पर आसमान के सबसे चमकीले ग्रह शुक्र की स्थिति नापी गयी थी. इस अध्ययन में नेहरु तारामंडल के खगोलविदों के अलावा एमेच्योर एस्त्रोनाम्र्स एसोसिएशन और गैर सरकारी संगठन स्पेस के सदस्य भी शामिल थे..

बड़ी बड़ी इमारतों से घिर जाने के कारण आज इनके अधययन सटीक नतीजे नहीं दे पाते है. यह दिल्ली में जन आंदोलनों प्रदर्शनो, धरनों की एक जानी मानी जगह भी है.....



तो भाइयो, देखा आपने कितना अद्भुत और अनोखा है हमारा जंतर मंतर
और हो भी क्यों न,!आखिर हमारी दिल्ली के लोगो ने इसको सही- सलामत रख कर अभी तक इसकी खूबसूरती को ज्यों का त्यों रखा है. तो दोस्तों, अब मैं चलता हूँ और अगली बार फिर ऐसे ही खूबसूरत सैर पर मैं आपको ले चलूँगा. तब तक के लिए जय जंतर मंतर की............................

Monday, May 3, 2010

THREATENING OF TERROR OVER COMMONWEALTH GAMES 2010





Commonwealth Games 2010  facing trouble due to the clouds of possible terror attacks. The fresh notice issues to the Indian Government of possible terror attacks during the Commonwealth Games by the US and Australian government.The recent bomb blast in Bangalore before the IPL match  has also a ign of  the possibilities of such mishaps.
Let's see what the commissioner of police and Honorable CM of Delhi  said over it :---


With the Commonwealth Games right around the corner the Delhi Police is not taking any chances. Recently Delhi Police Commissioner YS Dadwal had claimed that ''they are fully capable of handling any sort of situation.There would be no compromise on such matters and we assure an absolutely safe sporting event. There is no compromise on security issues. We want the Games to be held without any hitch."


















Mrs.Sheila dikshit CM of Delhi said that "Nobody’s life will come to a standstill. And certainly, no panic should be there. Of course, the police, the Home Ministry and the Lt Governor are doing their best




















                                                                ''''' HOPE FOR BEST''''' 


JAI HIND JAI BHARAT                                                                     
                                                                                                             SHASHANK VIKRAM SINGH  

Sports in the Commonwealth Games/Suresh Kumar Lau

The table below lists the sports currently in the Commonwealth Games. The dates are when the sport was first held, for men and women. Most of these sports have been in the Commonwealth fairly regularly since the date shown:

             Men       Women

Archery 1982       1982

Athletics 1930      1934

Aquatics 1930      1934

(Water Polo) 1938  —

Diving      1930      1930

Synchronized —    1986

Badminton 1966    1966

Basketball 2006    2006

Boxing      1930      —

Cricket     1998      —

Cycling     1934      1990

Fencing     1950      1950

Gymnastics 1978     1978

Hockey      1998      1998

Judo          1990       1990

Lawn Bowls 1930     —

Netball        —          1998

Rowing       1930       1986

Rugby 7s     1998         —

Shooting      1966        1994

Squash        1998        1998

Table Tennis 2002        2002

Ten Pin Bowling 1998   1998

Triathlon       2002         2002

Weightlifting  1938         2002

Wrestling      1930            —

SKL

भारत में क्रिकेट किसी खेल की तरह रहे और अंग्रेजी किसी भाषा की तरह तो किसी को कोई आपत्ति क्यों होगी ? डॉ.वैदिक


•अंग्रेजों के लिए अंग्रेजी उनकी सिर्फ मातृभाषा और राष्ट्रभाषा है लेकिन


‘भद्र भारतीयों’ के लिए यह उनकी पितृभाषा, राष्ट्रभाषा, प्रतिष्ठा-भाषा,

वर्चस्व-भाषा और वर्ग-भाषा बन गई है। अंग्रेजी और क्रिकेट हमारी गुलामी

की निरंतरता के प्रतीक हैं।



•जैसे अंग्रेजी भारत की आम जनता को ठगने का सबसे बड़ा साधन है, वैसे ही

क्रिकेट खेलों में ठगी का बादशाह बन गया है।



•जैसे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में भोले लोग अपने बच्चों को अपना पेट

काटकर पढ़ाते हैं, वैसे ही लोग क्रिकेट-मैचों के टिकिट खरीदते हैं, टीवी

से चिपके बैठे रहते हैं और खिलाड़ियों को देवताओं का दर्जा दे देते हैं।



•हमारे नेता जैसे अंग्रेजी की गुलामी करते हैं, वैसे ही वे क्रिकेट के

पीछे पगलाए रहते हैं। अब देश में कोई राममनोहर लोहिया तो है नहीं, जो

गुलामी के इन दोनों प्रतीकों को खुली चुनौती दे।



•भारत में क्रिकेट किसी खेल की तरह रहे और अंग्रेजी किसी भाषा की तरह तो

किसी को कोई आपत्ति क्यों होगी ? लेकिन खेल और भाषा यदि आजाद भारत की

औपनिवेशिक बेड़ियाँ बनी रहें तो उन्हें फिलहाल तोड़ना या तगड़ा झटका देना

ही बेहतर होगा।

Sunday, May 2, 2010

स्क्वैश (SQUASH)/सन्नी कुमार


स्क्वैश(SQUASH) को 1998 में राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल किया गया था उसके बाद से ही यह खेल राष्ट्रमंडल के मुख्य खेलों में शामिल है
स्क्वैश को पहले स्क्वैश रैकेट कहा जाता था
19 वीं शताब्दी में लन्दन के हैरो स्कूल में इस खेल का जन्म हुआ था
1860 में इस खेल का पहला कोर्ट हैरो(Harrow) इंग्लैण्ड में ही बना था
यह चार दीवारी में खेले जाने वाला खेल है जिसे एक समय में एकल स्पर्धा में दो और युगल स्पर्धा में चार व्यक्ति खेलते हैं
इसके कोर्ट की लम्बाई 32 फीट जबकि चौड़ाई 21 फीट होती है
इस खेल को रैकेट और एक छोटी रबर की बॉल के साथ खेलते हैं जिसमे बॉल का व्यास 39.5 से 40.5 मिलीमीटर और वज़न 23 से 25 ग्राम तक होता है
जबकि रैकेट की अधिकतम लम्बाई 686 मिलीमीटर (27.0 इंच) चौड़ाई 215 मिलीमीटर (8.5 इंच) और तारों वाले हिस्से का अधिकतम क्षेत्रफल 550 स्कवायर सेंटी मीटर होना चाहिए
इसके साथ ही वज़न 255 ग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए परन्तु ज्यादातर खिलाडियों के रैकेट का वज़न 110 से 200 का ही होता है
अभी तक के हुए राष्ट्रमंडल खेलो में इस खेल की पदक की रेस में ऑस्ट्रेलिया 22 पदकों(6 स्वर्ण 7 रजत 9 कांस्य) के साथ सबसे आगे चल रहा है वहीँ भारत ने अभी तक केवल 2002 के पुरुष सिंगल में भाग लिया है
भारत को अभी अपने पहले पदक का इन्तजार है


19 वां राष्ट्रमंडल खेल दिल्ली के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है
यहाँ होने वाले खेलों में स्क्वैश को पुरुष-एकल,महिला-एकल, पुरुष-युगल,महिला युगल और मिश्रित युगल के अंतर्गत खेला जाएगा यह सभी प्रतियोगिताएँ 4 से 13 अक्टूबर को दिल्ली के सीरी फोर्ट स्पोर्ट कॉंम्प्लेक्स में खेली जाएंगी